रविवार, 8 दिसंबर 2024

'द्रोण' पुस्तक के अंश का संकलन, एक कविता के रूप मे


यह कविता मेरी पुस्तक द्रोण के अंश का संकलन है। यह संकलन मैंने बांग्लादेश मे हो रहे हिन्दू नरसंहार के विरुद्ध रोष वश लिखा है

पांडवों की थी पीड़ा दैनिक 
मरते थे दस सहस्त्र सैनिक
भीषण पर्वत कब हारेगा 
बढ़ कौन समय को मारेगा ।।1

गंभीर विषय ये देख हरि 
थे विवश बड़े ये सोच हरि 
न कहिं बची कोई युक्ति शेष 
यही चिंता हरि की थी विशेष।।2

विधि लेखन क्या गलत होगा
या इसमे परिवर्तन होगा 
सब जान मंद मुस्काते हैं 
हरि इसका आनंद उठाते हैं ।।7

अर्जुन लहराता क्यूँ गैरों पर
कायर बन फिरता अपनों पर
जब सारी हुयी युक्ति असफल
समझाने की हर आस विफल।।16

क्षण छोड़ सारथी की पदवी
और दिया सुदर्शन तान वही
रथ छोड़ा और अश्व छोड़े 
प्रभु भीष्म का वध करने दौड़े।।29

एक कवि कूटनीति ना समझाता हो पर उसे लेखन और दर्द, पुकार, चीत्कार और प्रेम ज्यादा समझ आता है 
#bangladesh 

शनिवार, 7 दिसंबर 2024

जनरल विपिन रावत

मृत्यु अवश्यंभावी है जिसका आना तय हैं 
सांसों का थककर के बंद हो जाना क्षय हैं 
मिट जाने वाली इस थाती का नहीं भरोसा 
मातृभूमि का उत्तम कुसुम बनूँ निश्चय है।।

दिलेर और अदम्य साहस के पर्याय पूर्व #CDS स्व जनरल बिपिन रावत जी की शहादत दिवस पर भावभीनी श्रद्धांजलि
🫡

शुक्रवार, 6 दिसंबर 2024

पुराना स्वेटर



सर्दियां आ गयी लेकिन 
स्वेटर बुनते नहीं दिखती अब 
बुआ चाची ताई या मौसी
बहन बेटी दादी और पड़ोसी 

आते ही क्या खत्म हुई सर्दियां 
या ख़तम हो चुकी है फिक्र 
किसी सगे किसी अपने की 
या मशीनों का है ये किया धरा
.
.
कमबखत मशीने ! नाश हो इनका 
इकट्ठे बैठने का मौका भी छीना 
क्या हो जो न होंगी ये मशीने 
पर....
माँ भी तो अब कहाँ बुनतीं है 
उसका मशीनों से क्या लेना 
थक गई है इन्तेज़ार की धूप में 
कांपते हाथ आंख भी कमजोर है 
वो तो......

नाहक क्यों कोसना मशीनों को 
बिचारी चुप बैठती है कोने में 
अपलक देखती है थकी हुयी 
छाती जलने पर थोड़ा शोर मचाती हैं 
पर सुने कौन गलाफाड़ चिल्लाती हैं 
कौन देखता है बदलते दौर को 
अंधी दौड़ मे रौंदते किसी और को
मुझे भी तो एक अर्सा हुआ 
तो क्या इतने बदल गए है हम 
या इतने रिश्ते बदल गए 
चले कहां को थे किधर निकल गए 

#पुराना_स्वेटर 



आंसू

सिसकती रातों की मंजिल क्या है लरजते आसुंओं से हासिल क्या है जीते तो मिल ही जाती बादशाहत  पर हार जाने पे मुकम्मल क्या है।। थके तो...