बुधवार, 14 अक्टूबर 2026

ईष्ट

आज का शब्द है 👑 'ईष्ट'

Desired / Wished / Favorable / Beloved 

संस्कृत के 'इष्' (चाहना / कामना करना) धातु से बने इस शब्द का शाब्दिक अर्थ 'चाहा हुआ' या 'प्रिय' है।

अर्थ🔍: जो अत्यंत प्रिय हो, जिसकी कामना की गई हो, या जिसकी आराधना की जाए; आदरणीय, वांछित या आराध्य ।

इसके पर्यायवाची शब्द:

• वांछित / अभीष्ट 

• प्रिय / प्यारा 

• आराध्य / पूज्य 

• शुभ / अनुकूल 

नोट: उर्दू में इसके लिए 'मस्लूब', 'पसंदीदा', या 'महबूब / मुराद' का प्रयोग किया जाता है।

साहित्यिक संदर्भ 📙📙📙:

1️⃣ भारतीय परंपरा में 'इष्ट' या 'इष्टदेव' उस देवी-देवता या शक्ति को कहा जाता है जिसके प्रति व्यक्ति की अगाध निष्ठा, प्रेम और व्यक्तिगत समर्पण होता है।

2️⃣ काव्य और प्रेम-साहित्य में 'ईष्ट' या 'अभीष्ट' उस लक्ष्य या प्रियतम का प्रतीक है जिसे पाने के लिए कवि या नायक समस्त बाधाओं को पार करता है।

3️⃣ मनोविज्ञान में मनुष्य की गहरी इच्छाओं और आकांक्षाओं को उसका 'ईष्ट' कहा जा सकता है।

श्रद्धा के जिस अर्घ्य से, सजता है मन का घाट, 
वही ईष्ट बनकर तराशता, जीवन की हर एक बाट।

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मंगलवार, 13 अक्टूबर 2026

बेतकल्लुफी

बेतकल्लुफी से बोते रहे नफरत की फसल।
मै परेशान हूं ये कटेगी औ घर ही तो आवेगी।।

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सोमवार, 28 सितंबर 2026

बेटी

क्या ये वक्त है बदला, क्या हालात बदले हैं
क्या तासीर बदली है खूब जज्बात बदले हैं
स्टोव की ज़द में पहले होती थी बस बहुएं
अब सास ससुर भी नीले ड्रम के खतरे है।।
बडा खानदान है उसका जो बेटी देता है तुम्हे
अपने से बडा समझे है तो बेटी देता है तुम्हें 
तुम यूं बेमुरूव्वत जी रहे घर की दहलीज मे
उसकी सिसकियों का सैलाब जला न दे तुम्हें ।।
खाली हाथ आया भाई तो आंख भर आयी
जो कुछ छिपाया था हथेली पर रख आयी
गुल्लक में छिपा दिये शौहर के चांटे सारे
वह भाई से मिली भी तो मुस्करा कर आयी।।
जमीं पे गिरे आंसू वो अब तेजाब हो गये
सिसकियां जो बदलीं तो अजाब हो गये
दहलीज में बैठे गिने वो चांदी के सिक्के
बेटी की ससुराल वाले बेनकाब हो गये।।

बाग से फूल हटाओगे तो माली क्या ही करेगा
हंसी चिड़िया मिटाओगे तो जंगल क्या ही करेगा
जिसकी मुस्कराहट पर सारी उम्र जिया उसने
उसकी गुड़िया जलाओगे तो बाप क्या ही करेगा।।


आंगन की गौरैया बचायी जालिम जमाने से
और तुम्हें सौंपी हो बड़ी मिन्नत से, मनाने से
वो भूचाल थाम कर  पी लेगा समंदर सारा 
खता न करना, बचना उसे आजमाने से।।
जख्म देना गर उसे तो बस बेपरवाह ना होना
ख्याल रखना उसका कभी लापरवाह न होना
बेटियां सबसे अजीम चीज होती हैं बाप की
जिंदा हो बाप तो बेटी रूलाकर चैन से न सोना।।

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शुक्रवार, 11 सितंबर 2026

मुहावरेदार:- बंदर 🐒 क्या जाने अदरक का स्वाद

मुहावरेदार:- बंदर 🐒 क्या जाने अदरक का स्वाद

शुक्रवार की बाजार मे थैले और जेब का भरसक संतुलन बनाने का प्रयास करते हुए मैं अगली खरीदारी को बढा ही था कि श्रीमती जी का फोन आ गया
मैने एक ही झटके मे सब बता दिया जो खरीद चुका था और जो खरीदने वाला था ।
वो दूर दराज किसी कस्बे के दबंग थानेदार की तरह पूछती रही मै एक सीधे साधे ग्रामीण की तरह सकपकाता जवाब देता चला गया।
सब ठीक चल रहा था अचानक उसे अदरक का ध्यान आ गया
बोली तीन बार से अदरक नही ला रहे हो
मैने भी तपाक से जवाब दिया, ले लिया है, बताना भूल गया
काल काटकर मै अदरक वाले को ढूंढता आगे बढा वह कोने मे खडा था उसकी रेहडी पर बहुत कम भीड़ थी।
मैने जब दाम पूछा तो पता चला 400रू प्रति किलो
थकहार कर मुझे 100ग्राम खरीदना ही पडा
फिर वापस लौटते हुए अदरक मेरे दिमाग में कौंधने लगा

"बंदर क्या जाने अदरक का स्वाद"

अक्सर घरों मुहल्लों चौक चौबारे और सामान्य बोलचाल में यह तंजपूर्ण मुहावरा चिपका दिया जाता है।

अदरक 🫚 जिसे संस्कृत में शुष्ठी भी कहते हैं। यह एक औषधीय पौधा है जिसका वानस्पतिक नाम जिंजिबर ऑफ़िसिनेल है और यह हमारे दक्षिण एशिया की देशीय उपज है लेकिन यह स्वभाव से अति कडवा और गर्म होता है। इसके गुण दोष का मूल्यांकन करें तो कहीं भी यह नही लगता कि यह किसी को पारितोषिक के तौर पर दिया जा सके।
हां यदि किसी से मित्रता बढानी हो तो उस खांसते या सिसकते व्यक्ति को मस्त अदरक की चाय पर आमंत्रित किया जा सकता है।
इसके अलावा पुराने टाइम मे जब कोका कोला पेप्सी जैसे ठंडे पेय पदार्थ नही थे तो हमसे जस्ट पहले वाली पीढी शायद कालेज कैंटीन मे अपनी महिला मित्र को जरूर अदरक की चाय ही पिला कर प्रपोज❤️ करती रही होगी।
केरोसीन वाले स्टोव पर तपते पतीले में उबलती चाय और उसमे कूट कूटकर डाली गयी अदरक उसके स्वाद को और तीक्ष्ण कर देती है। यह तीक्ष्णता हृदय की गहराईयों में उतरते हुए किसी का हाथ थामने को मजबूर कर देती होगी
और शायद यही वो पल है जब इजहार कर दिया जाता रहा होगा खैर
इसके अलावा अदरक का घरेलु उपयोग भी है जिसमें उसकी कतरनें उदर के रोगी को नमक से खिलायी जाती हैं तथा कच्चे अदरक की चटनी जो सिल बट्टे पर पिसी हुई मिल जाये तो बस अह हा हा.....भोजन करने वाले का मन तृप्त हो जाये।

फिलहाल बंदरों को तो न चाय बनानी आती है न ही वो सिल बट्टे का प्रयोग करना जानते हैं फिर उसे अदरक थमाने का क्या प्रयोजन रहा होगा।

जरूर मुहावरा बनाने वाले का बंदरों से कोई बैर रहा होगा तभी तो उसे अदरक जैसी कीमती चीज थमा कर व्यंग्य किया जाता है..........
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गुरुवार, 3 सितंबर 2026

जन्माष्टमी विशेष

सुबह-सुबह जैसे ही नींद खुली तो "ठाकुर जी" का बडा सलोना सा एक चित्र मेज पर रखा था


कैसी मनोहर तस्वीर है
माथे पर चंदन लगा हुआ है
जैसे किसी ने "Happy Birthday" वाला टीका माथे पर लगा दिया हो❤️🫡🙏

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गुरुवार, 27 अगस्त 2026

विरला संयोग

सुबह के मद्धम शोरगुल मे 'गोरखधाम सुपरफास्ट एक्सप्रेस' जैसे ही सरयू नदी के चौका घाट से आगे बढती है डिब्बे मे एक बुलंद आवाज गूंजती है

दीन दयाल विरिदु सम भारी
हरहू नाथ ममं संकट भारी

गेरूआ वस्त्र पहने हुए भरे पूरे शरीर वाले एक सूर लाठी की टेक लगाये चले आते हैं
धीरे धीरे आगे बढते हुए
किसी ने हाथ पकड़कर एक सिक्का दे दिया और किसी ने मुंह फेर लिया लेकिन वो बिना विचलित हुए चले जाते हैं
मै 12-15 वर्षो से यह संयोग देख रहा हूं

वही गाड़ी
वही गायक
वही मै
वही सरयू
वही चौपाई

बडा ही विरला संयोग है ।
मै हर बार इसमें अपना 10 रूपीय योगदान कर इस संयोग पर अचंभित रह जाता हूं

शनिवार, 22 अगस्त 2026

23rd August 2026

काँटा कठोर है तीखा है, उसमें उसकी मर्यादा है ।।।
मै कब कहता वो घटकर प्रांतर का ओछा फूल बने।
परिश्रमी लोगों की असफ़लता पर धीरज बढाती ये पंक्तियां प्रेरणा का वो गीत है जो झुके हुए कंधों और शीश को पुन: प्रयास के लिए तैयार कर देती हैं.....

ईष्ट

आज का शब्द है 👑 'ईष्ट' Desired / Wished / Favorable / Beloved  संस्कृत के 'इष्' (चाहना / कामना करना) धातु से बन...