Shashivendra SHASHI
शशिवेंद्र 'शशि' एक लेखक और विचारक हैं जो लगभग दो दशकों से शिक्षण, अनुसंधान और लेखन के क्षेत्र से जुड़े हुए हैं। अपने लेखन के माध्यम से वह भारतीय समाज की परंपराओं और रुढ़ियों की जटिलताओं में गहराई से जाते हैं। वह जाति प्रणाली और असमानताओं की आलोचना करते हैं और सांस्कृतिक न्याय और समानता के लिए मजबूती से वकालत करते हैं। शशि समानता और सुलभ न्याय के लिए वकालत करते हैं, साथ ही साथ महान सांस्कृतिक विरासत का जश्न मनाते हैं। ट्विटर: @Shashivendra84 सोशल मीडिया हैशटैग: #Ssps96
रविवार, 1 नवंबर 2026
चिरैयादह का मलेर
बिना विचारे काम मत करो
एक किसानने एक नेवला पाल रखा था। नेवला बहुत चतुर और स्वाभिमक्त था। एक दिन किसान कहीं गया था।
किसान की स्त्रीने अपने छोटे बच्चे को दूध पिलाकर सुला दिया और नेवलेको वहीं छोड़कर वह घड़ा और रस्सी लेकर कुएँ पर पानी भरने चली गयी।
किसान की स्त्री के चले जानेपर वहाँ एक काला साँप बिल में से निकल आया। बच्चा पृथ्वीपर कपड़ा बिछाकर सुलाया गया था और साँप बच्चे की ओर ही आ रहा था। नेवले ने यह देखा तो साँप के ऊपर टूट पड़ा। उसने साँपको काटकर टुकड़े-टुकड़े कर डाला और घर के दरवाजे पर किसान की स्त्री का रास्ता देखने गया।
किसान की स्त्री घड़ा भरकर लौटी। उसने घर के बाहर दरवाजे पर नेवले को देखा। नेवले के मुख में रक्त लगा देखकर उसने समझा कि इसने मेरे बच्चे को काटा है। दुःख और क्रोध के मारे भरा घड़ा उसने नेवलेपर पटक दिया। बेचारा नेवला कुचलकर मर गया।
वह स्त्री दौड़कर घर में आयी। उसने देखा कि उसका बच्चा सुख से सो रहा है और वहाँ एक काला साँप कटा पड़ा है। स्त्री को अपनी भूल का पता लग गया। वह दौड़कर फिर नेवलेके पास आयी और मरे नेवलेको गोदमें उठाकर रोने लगी। लेकिन अब उसके रोनेसे क्या लाभ? इसीलिये कहा है—
बिना बिचारे जो करै, सो पाछे पछताय। काम बिगारै आपनो, जग में होत हँसाय॥
मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026
अनाहत
बुधवार, 14 अक्टूबर 2026
ईष्ट
मंगलवार, 13 अक्टूबर 2026
सोमवार, 28 सितंबर 2026
बेटी
शुक्रवार, 11 सितंबर 2026
मुहावरेदार:- बंदर 🐒 क्या जाने अदरक का स्वाद
मुहावरेदार:- बंदर 🐒 क्या जाने अदरक का स्वाद
शुक्रवार की बाजार मे थैले और जेब का भरसक संतुलन बनाने का प्रयास करते हुए मैं अगली खरीदारी को बढा ही था कि श्रीमती जी का फोन आ गया
मैने एक ही झटके मे सब बता दिया जो खरीद चुका था और जो खरीदने वाला था ।
वो दूर दराज किसी कस्बे के दबंग थानेदार की तरह पूछती रही मै एक सीधे साधे ग्रामीण की तरह सकपकाता जवाब देता चला गया।
सब ठीक चल रहा था अचानक उसे अदरक का ध्यान आ गया
बोली तीन बार से अदरक नही ला रहे हो
मैने भी तपाक से जवाब दिया, ले लिया है, बताना भूल गया
काल काटकर मै अदरक वाले को ढूंढता आगे बढा वह कोने मे खडा था उसकी रेहडी पर बहुत कम भीड़ थी।
मैने जब दाम पूछा तो पता चला 400रू प्रति किलो
थकहार कर मुझे 100ग्राम खरीदना ही पडा
फिर वापस लौटते हुए अदरक मेरे दिमाग में कौंधने लगा
"बंदर क्या जाने अदरक का स्वाद"
अक्सर घरों मुहल्लों चौक चौबारे और सामान्य बोलचाल में यह तंजपूर्ण मुहावरा चिपका दिया जाता है।
अदरक 🫚 जिसे संस्कृत में शुष्ठी भी कहते हैं। यह एक औषधीय पौधा है जिसका वानस्पतिक नाम जिंजिबर ऑफ़िसिनेल है और यह हमारे दक्षिण एशिया की देशीय उपज है लेकिन यह स्वभाव से अति कडवा और गर्म होता है। इसके गुण दोष का मूल्यांकन करें तो कहीं भी यह नही लगता कि यह किसी को पारितोषिक के तौर पर दिया जा सके।
हां यदि किसी से मित्रता बढानी हो तो उस खांसते या सिसकते व्यक्ति को मस्त अदरक की चाय पर आमंत्रित किया जा सकता है।
इसके अलावा पुराने टाइम मे जब कोका कोला पेप्सी जैसे ठंडे पेय पदार्थ नही थे तो हमसे जस्ट पहले वाली पीढी शायद कालेज कैंटीन मे अपनी महिला मित्र को जरूर अदरक की चाय ही पिला कर प्रपोज❤️ करती रही होगी।
केरोसीन वाले स्टोव पर तपते पतीले में उबलती चाय और उसमे कूट कूटकर डाली गयी अदरक उसके स्वाद को और तीक्ष्ण कर देती है। यह तीक्ष्णता हृदय की गहराईयों में उतरते हुए किसी का हाथ थामने को मजबूर कर देती होगी
और शायद यही वो पल है जब इजहार कर दिया जाता रहा होगा खैर
इसके अलावा अदरक का घरेलु उपयोग भी है जिसमें उसकी कतरनें उदर के रोगी को नमक से खिलायी जाती हैं तथा कच्चे अदरक की चटनी जो सिल बट्टे पर पिसी हुई मिल जाये तो बस अह हा हा.....भोजन करने वाले का मन तृप्त हो जाये।
फिलहाल बंदरों को तो न चाय बनानी आती है न ही वो सिल बट्टे का प्रयोग करना जानते हैं फिर उसे अदरक थमाने का क्या प्रयोजन रहा होगा।
जरूर मुहावरा बनाने वाले का बंदरों से कोई बैर रहा होगा तभी तो उसे अदरक जैसी कीमती चीज थमा कर व्यंग्य किया जाता है..........
#HindiKathaye #हिन्दीकथाएं #HindiStories #हिन्दीसाहित्य #हिन्दीकहानी #साहित्य #मातृभाषा #हिन्दीग्राम #हिन्दीहमारीपहचान
चिरैयादह का मलेर
चिरैयादह वर्तमान पंजाब और हरियाणा की सीमा से लगी एक स्वतंत्र रियासत थी। यह मलेर राजपूतों की राजधानी थी। किंवदन्ती है कि एक मलेर दस दिलेर के ...
-
वृद्धाश्रम में सुबह की चाय पीते हुए शारदा बाबू नीम के पेड़ के नीचे वाले चबूतरे पर बैठ गये थे। सेवानिवृत्त होने के बाद धीरे धीरे यह तीसरा साल...
-
सिसकती रातों की मंजिल क्या है लरजते आसुंओं से हासिल क्या है जीते तो मिल ही जाती बादशाहत पर हार जाने पे मुकम्मल क्या है।। थके तो...
-
इतिहास मे प्रतिज्ञा पर आधारित कई महान घटनायें हुई इन पर अनेकों रोचक वर्णन और कथायें आज भी मौजूद है। यहां तक की कई विद्वान 'भीष्म प्रतिज्...