Shashivendra SHASHI
शशिवेंद्र 'शशि' एक लेखक और विचारक हैं जो लगभग दो दशकों से शिक्षण, अनुसंधान और लेखन के क्षेत्र से जुड़े हुए हैं। अपने लेखन के माध्यम से वह भारतीय समाज की परंपराओं और रुढ़ियों की जटिलताओं में गहराई से जाते हैं। वह जाति प्रणाली और असमानताओं की आलोचना करते हैं और सांस्कृतिक न्याय और समानता के लिए मजबूती से वकालत करते हैं। शशि समानता और सुलभ न्याय के लिए वकालत करते हैं, साथ ही साथ महान सांस्कृतिक विरासत का जश्न मनाते हैं। ट्विटर: @Shashivendra84 सोशल मीडिया हैशटैग: #Ssps96
सोमवार, 28 सितंबर 2026
बेटी
शुक्रवार, 11 सितंबर 2026
मुहावरेदार:- बंदर 🐒 क्या जाने अदरक का स्वाद
मुहावरेदार:- बंदर 🐒 क्या जाने अदरक का स्वाद
शुक्रवार की बाजार मे थैले और जेब का भरसक संतुलन बनाने का प्रयास करते हुए मैं अगली खरीदारी को बढा ही था कि श्रीमती जी का फोन आ गया
मैने एक ही झटके मे सब बता दिया जो खरीद चुका था और जो खरीदने वाला था ।
वो दूर दराज किसी कस्बे के दबंग थानेदार की तरह पूछती रही मै एक सीधे साधे ग्रामीण की तरह सकपकाता जवाब देता चला गया।
सब ठीक चल रहा था अचानक उसे अदरक का ध्यान आ गया
बोली तीन बार से अदरक नही ला रहे हो
मैने भी तपाक से जवाब दिया, ले लिया है, बताना भूल गया
काल काटकर मै अदरक वाले को ढूंढता आगे बढा वह कोने मे खडा था उसकी रेहडी पर बहुत कम भीड़ थी।
मैने जब दाम पूछा तो पता चला 400रू प्रति किलो
थकहार कर मुझे 100ग्राम खरीदना ही पडा
फिर वापस लौटते हुए अदरक मेरे दिमाग में कौंधने लगा
"बंदर क्या जाने अदरक का स्वाद"
अक्सर घरों मुहल्लों चौक चौबारे और सामान्य बोलचाल में यह तंजपूर्ण मुहावरा चिपका दिया जाता है।
अदरक 🫚 जिसे संस्कृत में शुष्ठी भी कहते हैं। यह एक औषधीय पौधा है जिसका वानस्पतिक नाम जिंजिबर ऑफ़िसिनेल है और यह हमारे दक्षिण एशिया की देशीय उपज है लेकिन यह स्वभाव से अति कडवा और गर्म होता है। इसके गुण दोष का मूल्यांकन करें तो कहीं भी यह नही लगता कि यह किसी को पारितोषिक के तौर पर दिया जा सके।
हां यदि किसी से मित्रता बढानी हो तो उस खांसते या सिसकते व्यक्ति को मस्त अदरक की चाय पर आमंत्रित किया जा सकता है।
इसके अलावा पुराने टाइम मे जब कोका कोला पेप्सी जैसे ठंडे पेय पदार्थ नही थे तो हमसे जस्ट पहले वाली पीढी शायद कालेज कैंटीन मे अपनी महिला मित्र को जरूर अदरक की चाय ही पिला कर प्रपोज❤️ करती रही होगी।
केरोसीन वाले स्टोव पर तपते पतीले में उबलती चाय और उसमे कूट कूटकर डाली गयी अदरक उसके स्वाद को और तीक्ष्ण कर देती है। यह तीक्ष्णता हृदय की गहराईयों में उतरते हुए किसी का हाथ थामने को मजबूर कर देती होगी
और शायद यही वो पल है जब इजहार कर दिया जाता रहा होगा खैर
इसके अलावा अदरक का घरेलु उपयोग भी है जिसमें उसकी कतरनें उदर के रोगी को नमक से खिलायी जाती हैं तथा कच्चे अदरक की चटनी जो सिल बट्टे पर पिसी हुई मिल जाये तो बस अह हा हा.....भोजन करने वाले का मन तृप्त हो जाये।
फिलहाल बंदरों को तो न चाय बनानी आती है न ही वो सिल बट्टे का प्रयोग करना जानते हैं फिर उसे अदरक थमाने का क्या प्रयोजन रहा होगा।
जरूर मुहावरा बनाने वाले का बंदरों से कोई बैर रहा होगा तभी तो उसे अदरक जैसी कीमती चीज थमा कर व्यंग्य किया जाता है..........
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गुरुवार, 3 सितंबर 2026
गुरुवार, 27 अगस्त 2026
विरला संयोग
दीन दयाल विरिदु सम भारी
हरहू नाथ ममं संकट भारी
गेरूआ वस्त्र पहने हुए भरे पूरे शरीर वाले एक सूर लाठी की टेक लगाये चले आते हैं
धीरे धीरे आगे बढते हुए
किसी ने हाथ पकड़कर एक सिक्का दे दिया और किसी ने मुंह फेर लिया लेकिन वो बिना विचलित हुए चले जाते हैं
मै 12-15 वर्षो से यह संयोग देख रहा हूं
वही गाड़ी
वही गायक
वही मै
वही सरयू
वही चौपाई
बडा ही विरला संयोग है ।
मै हर बार इसमें अपना 10 रूपीय योगदान कर इस संयोग पर अचंभित रह जाता हूं
शनिवार, 22 अगस्त 2026
23rd August 2026
मंगलवार, 18 अगस्त 2026
मेरी शतरंज यात्रा
रविवार, 21 जून 2026
आंसू
बेटी
क्या ये वक्त है बदला, क्या हालात बदले हैं क्या तासीर बदली है खूब जज्बात बदले हैं स्टोव की ज़द में पहले होती थी बस बहुएं अब सास ससुर भी नीले ...
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वृद्धाश्रम में सुबह की चाय पीते हुए शारदा बाबू नीम के पेड़ के नीचे वाले चबूतरे पर बैठ गये थे। सेवानिवृत्त होने के बाद धीरे धीरे यह तीसरा साल...
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सिसकती रातों की मंजिल क्या है लरजते आसुंओं से हासिल क्या है जीते तो मिल ही जाती बादशाहत पर हार जाने पे मुकम्मल क्या है।। थके तो...
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शीर्षक - वफादार घोड़े :- 🐎 आज के परिवेश मे राजनीतिक कार्यकर्ताओं की घोर निष्ठा और वफादारी अपनी स्वामिभक्ति के लिए विख...