रविवार, 21 जून 2026

आंसू

सिसकती रातों की मंजिल क्या है
लरजते आसुंओं से हासिल क्या है
जीते तो मिल ही जाती बादशाहत 
पर हार जाने पे मुकम्मल क्या है।।

थके तो हांफकर सो जाते जमीं पर
ओढ लेते इस दुनिया का सारा गम
बची है सांसे, अभी आजमा लेते हैं
हार उम्दा है तो फिर जाहिल क्या है।।

घबराने पे थाम लेना वो हाथ नाजुक 
फखत इक हिस्सा है उस कहानी का
जहां लबों तक न आ सकी हां उसकी
बड़ी हिम्मत से दांव था लगाया उसने।।

#hindi #hindisong

आंसू

सिसकती रातों की मंजिल क्या है लरजते आसुंओं से हासिल क्या है जीते तो मिल ही जाती बादशाहत  पर हार जाने पे मुकम्मल क्या है।। थके तो...