क्या ये वक्त है बदला, क्या हालात बदले हैं
क्या तासीर बदली है खूब जज्बात बदले हैं
स्टोव की ज़द में पहले होती थी बस बहुएं
अब सास ससुर भी नीले ड्रम के खतरे है।।
बडा खानदान है उसका जो बेटी देता है तुम्हे
अपने से बडा समझे है तो बेटी देता है तुम्हें
तुम यूं बेमुरूव्वत जी रहे घर की दहलीज मे
उसकी सिसकियों का सैलाब जला न दे तुम्हें ।।
खाली हाथ आया भाई तो आंख भर आयी
जो कुछ छिपाया था हथेली पर रख आयी
गुल्लक में छिपा दिये शौहर के चांटे सारे
वह भाई से मिली भी तो मुस्करा कर आयी।।
जमीं पे गिरे आंसू वो अब तेजाब हो गये
सिसकियां जो बदलीं तो अजाब हो गये
दहलीज में बैठे गिने वो चांदी के सिक्के
बेटी की ससुराल वाले बेनकाब हो गये।।
बाग से फूल हटाओगे तो माली क्या ही करेगा
हंसी चिड़िया मिटाओगे तो जंगल क्या ही करेगा
जिसकी मुस्कराहट पर सारी उम्र जिया उसने
उसकी गुड़िया जलाओगे तो बाप क्या ही करेगा।।
आंगन की गौरैया बचायी जालिम जमाने से
और तुम्हें सौंपी हो बड़ी मिन्नत से, मनाने से
वो भूचाल थाम कर पी लेगा समंदर सारा
खता न करना, बचना उसे आजमाने से।।
जख्म देना गर उसे तो बस बेपरवाह ना होना
ख्याल रखना उसका कभी लापरवाह न होना
बेटियां सबसे अजीम चीज होती हैं बाप की
जिंदा हो बाप तो बेटी रूलाकर चैन से न सोना।।
#beti #bitiya #daughters #daughterlove #hindikathaye
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें