शशिवेंद्र 'शशि' एक लेखक और विचारक हैं जो लगभग दो दशकों से शिक्षण, अनुसंधान और लेखन के क्षेत्र से जुड़े हुए हैं। अपने लेखन के माध्यम से वह भारतीय समाज की परंपराओं और रुढ़ियों की जटिलताओं में गहराई से जाते हैं। वह जाति प्रणाली और असमानताओं की आलोचना करते हैं और सांस्कृतिक न्याय और समानता के लिए मजबूती से वकालत करते हैं। शशि समानता और सुलभ न्याय के लिए वकालत करते हैं, साथ ही साथ महान सांस्कृतिक विरासत का जश्न मनाते हैं। ट्विटर: @Shashivendra84 सोशल मीडिया हैशटैग: #Ssps96
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)
ईष्ट
आज का शब्द है 👑 'ईष्ट' Desired / Wished / Favorable / Beloved संस्कृत के 'इष्' (चाहना / कामना करना) धातु से बन...
-
वृद्धाश्रम में सुबह की चाय पीते हुए शारदा बाबू नीम के पेड़ के नीचे वाले चबूतरे पर बैठ गये थे। सेवानिवृत्त होने के बाद धीरे धीरे यह तीसरा साल...
-
सिसकती रातों की मंजिल क्या है लरजते आसुंओं से हासिल क्या है जीते तो मिल ही जाती बादशाहत पर हार जाने पे मुकम्मल क्या है।। थके तो...
-
इतिहास मे प्रतिज्ञा पर आधारित कई महान घटनायें हुई इन पर अनेकों रोचक वर्णन और कथायें आज भी मौजूद है। यहां तक की कई विद्वान 'भीष्म प्रतिज्...
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें