दीन दयाल विरिदु सम भारी
हरहू नाथ ममं संकट भारी
गेरूआ वस्त्र पहने हुए भरे पूरे शरीर वाले एक सूर लाठी की टेक लगाये चले आते हैं
धीरे धीरे आगे बढते हुए
किसी ने हाथ पकड़कर एक सिक्का दे दिया और किसी ने मुंह फेर लिया लेकिन वो बिना विचलित हुए चले जाते हैं
मै 12-15 वर्षो से यह संयोग देख रहा हूं
वही गाड़ी
वही गायक
वही मै
वही सरयू
वही चौपाई
बडा ही विरला संयोग है ।
मै हर बार इसमें अपना 10 रूपीय योगदान कर इस संयोग पर अचंभित रह जाता हूं
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