शनिवार, 22 अगस्त 2026

23rd August 2026

काँटा कठोर है तीखा है, उसमें उसकी मर्यादा है ।।।
मै कब कहता वो घटकर प्रांतर का ओछा फूल बने।
परिश्रमी लोगों की असफ़लता पर धीरज बढाती ये पंक्तियां प्रेरणा का वो गीत है जो झुके हुए कंधों और शीश को पुन: प्रयास के लिए तैयार कर देती हैं.....

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23rd August 2026

काँटा कठोर है तीखा है, उसमें उसकी मर्यादा है ।।। मै कब कहता वो घटकर प्रांतर का ओछा फूल बने। परिश्रमी लोगों की असफ़लता पर धीरज बढ...