गुरुवार, 15 दिसंबर 2022

कपोत और वनराज

शांति कपोतों की बिरियानी वे नित्य चाव से खाते थे।

क्षुधातृप्ति की हिचकी ले हमको सदा चिढ़ाते थे।।

हम चोटिल चोटिल रहते थे घाटी मे अत्याचारों से।

हम थे अवाक् कश्मीरी जन्नत मे जेहादी नारों से।।

अबकी सिंहासन पर गिर का बाज बिठाया है हमने।

उनकी चाले सीधी कर दे वनराज बिठाया है हमने।।

#Ssps96


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