रविवार, 27 अक्टूबर 2024

विस्मृत ईंटें

*****************विस्मृत ईंटें 🏰 🧱***************

इतिहास में हिन्दु राजाओं की वीरता और बलिदान के अनगिनत उदाहरण है लेकिन क्या राजपरिवार की स्त्रियों के त्याग और समर्पण पर भी इतिहास इतना ही मुखर रहा है।
उर्मिला, दमयंती, शकुंतला, राधा, यशोधरा और पद्मावती सरीखे ऐसे अनगिनत नाम है जिन्होने अपने मौन बलिदान से अविस्मरणीय रेखा खींची सनातन को सशक्त आधार प्रदान किया है।


ये सनातन धर्म की वह 'विस्मृत ईंटें' हैं जिन्हें पुनः स्मरण करने तथा घर घर तक इस जागृति को पहुंचाने की आवश्यकता है। 

सशक्त और समर्थ समाज के लिए 'जननी' का संस्कारी होना भी बराबर आवश्यक है।।
बलिदान सदैव शीश कटाकर ही नही दिया जाता स्वार्थ और निज हितों का बलिदान भी पूजनीय त्याग माना जाता है।।

Forgotten Bricks 🏰🧱

History holds countless examples of the bravery and sacrifices of Hindu kings, but has it equally highlighted the sacrifices and dedication of the royal women? Names like Urmila, Damayanti, Shakuntala, Radha, Yashodhara, and Padmavati are countless women who, through their Supreme & silent sacrifices, have drawn an unforgettable line, providing a strong foundation for Sanatan Dharma.

These are the 'forgotten bricks' of Sanatan Dharma that need to be remembered and brought into the consciousness of every household. For a strong and capable society, it is equally essential for a mother to be virtuous and cultured.

Sacrifice is not always marked by the shedding of blood; even the renunciation of selfishness and personal interests is considered a noble form of sacrifice. 🙏🙏🪷

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बुधवार, 4 सितंबर 2024

गुरू महिमा के हिन्दी दोहे

            हिन्दी और गुरू महिमा 

🙏गुरू अंधेरे जीवन में प्रकाश लाते हैं। हालांकि यह कोई औपचारिक पद नहीं है, प्रत्येक व्यक्ति जिसने ज्ञान देकर दूसरे के जीवन को बेहतर बनाया है, वह गुरु है।

 
-) सब धरती कागज करूँ, लिखनी सब बनराय
   सात समुद्र की मसि करूँ, गुरु गुण लिखा न जाय 

-) गुरू गोविन्द दोऊ खड़े, काके लागूं पांय
    बलिहारी गुरू अपने गोविन्द दियो बताय 

-) कुमति कीच चेला भरा, गुरु ज्ञान जल होय
    जनम - जनम का मोरचा, पल में डारे धोया 

-) गुरु कुम्हार शिष कुंभ है, गढ़ि - गढ़ि काढ़ै खोट
    अन्तर हाथ सहार दै, बाहर बाहै चोट 

-) गुरु समान दाता नहीं, याचक शीष समान
    तीन लोक की सम्पदा, सो गुरु दीन्ही दान 

-) गुरु को सिर राखिये, चलिये आज्ञा माहिं
   कहैं कबीर ता दास को, तीन लोकों भय नाहिं 

-) गुरु मूरति आगे खड़ी, दुतिया भेद कुछ नाहिं
    उन्हीं कूं परनाम करि, सकल तिमिर मिटि जाहिं 

-) ज्ञान समागम प्रेम सुख, दया भक्ति विश्वास
    गुरु सेवा ते पाइए, सद् गुरु चरण निवास 

-) कबीरा ते नर अन्ध है गुरु को कहते और 
    हरि रूठे गुरु ठौर है गुरु रुठै नहीं ठौर 

-) गुरु बिन ज्ञान न उपजै गुरु बिन मिलै न मोक्ष 
    गुरु बिन लखै न सत्य को गुरु बिन मिटै न दोष 

-) तगुरू पारस को अन्तरो, जानत हैं सब संत
    वह लोहा कंचन करे, ये करि लेय महंत 

-) कुमति कीच चेला भरा गुरु ज्ञान जल होय
    जनम जनम का मोरचा पल में डारे धोय 

-) गुरु किया है देह का सतगुरु चीन्हा नाहिं 
   भवसागर के जाल में फिर फिर गोता खाहि

-) शब्द गुरु का शब्द है काया का गुरु काय
    भक्ति करै नित शब्द की सत्गुरु यौं समुझाय 

-) जो गुरु ते भ्रम न मिटे भ्रान्ति न जिसका जाय
    सो गुरु झूठा जानिये त्यागत देर न लाय

-) यह तन विषय की बेलरी गुरु अमृत की खान
    सीस दिये जो गुरु मिलै तो भी सस्ता जान

-) गुरु लोभ शिष लालची दोनों खेले दाँव
    दोनों बूड़े बापुरे चढ़ि पाथर की नाँव

-) मूल ध्यान गुरू रूप है मूल पूजा गुरू पाव 
    मूल नाम गुरू वचन है मूल सत्य सतभाव 

-) गुरु की आज्ञा आवै, गुरु की आज्ञा जाय 
    कहैं कबीर सो संत हैं, आवागमन नशाय 

-) जो गुरु बसै बनारसी, शीष समुन्दर तीर 
    एक पलक बिखरे नहीं, जो गुण होय शारीर तो भी सस्ता जान 

-) गुरु लोभ शिष लालची दोनों खेले दाँव
    दोनों बूड़े बापुरे चढ़ि पाथर की नाँव 

-) मूल ध्यान गुरू रूप है मूल पूजा गुरू पाव 
    मूल नाम गुरू वचन है मूल सत्य सतभाव  

-) गुरु की आज्ञा आवै, गुरु की आज्ञा जाय 
    कहैं कबीर सो संत हैं, आवागमन नशाय 

-) जो गुरु बसै बनारसी, शीष समुन्दर तीर 
    एक पलक बिखरे नहीं, जो गुण होय शारीर 

कबीर दास ने गुरु-शिष्य संबंध के महत्व पर बल दिया, यह कहते हुए कि एक सच्चा गुरु शिष्य को आध्यात्मिक ज्ञान की ओर मार्गदर्शन कर सकता है। उन्होंने इस विषय पर अपनी कविताओं और दोहों में विस्तार से लिखा। कबीर दास की शिक्षाएं और लेखन आज भी आध्यात्मिक मार्ग पर चलने वाले लोगों को प्रेरणा देती हैं, भारतीय आध्यात्मिक परंपराओं में गुरु-शिष्य परंपरा के महत्व को उजागर करती हैं।

उन्होने गुरु-शिष्य प्रेम की महिमा गाई, सच्चा गुरु जो शिष्य को ज्ञान के द्वार तक ले जाए।उनकी कविताओं और दोहों में यही संदेश है, गुरु-शिष्य परंपरा के महत्व का वर्णन भारतीय आध्यात्मिकता में भी है।

सोमवार, 29 जनवरी 2024

अंधेरा बुरा है क्या .......

अंधेरे को बुरा अब मत कहना
कमी मे जुड़कर यह इज्जत के रफूगर जैसा है

पता न चले कमी कुछ भी चाहे कैसी भी हो
चार लवों पे न आये बात चाहे जैसी भी हो
इस अंधेरे का एक वज़ूद है बड़ा ही खास
मजबूरी के नंगे बदन का बनता लिबास। ०१


अंधेरे को बुरा अब मत कहना
जरूरी होता है कुछ बातो का कोई राजदार न हो

चिराग का उजाला सभी को बड़ा प्यारा है
जलता हो गर वो पड़ोसी की दहलीज में
बस मद्धम रौशनी देता रहे सुकून की
ख्वाहिश करे न कभी तेल न बाती की।।०२

अंधेरे को बुरा अब मत कहना
घुमड़ती है चाहत उन्हें अपने जोर आजमाइश की

उनसे बड़ा कोई अय्यार तो न हुआ अभी
पता लगाने की जुगत मे भींचते है मुट्ठी
गिरा हाथ तो इज्जत चली जायेगी
पर अंधेरे मे खाक़ बात फैल पायेगी।।०३

अंधेरे को बुरा अब मत कहना
अब तो चांद की रौशनी पर भी किराया देना होगा

अपने हिस्से के आसमां का सबब भूल ही जा
कौन मकबूलियत के आसरे बैठा निहारेगा
मेहनत की रोटी है या रोटी अपने नसीब की
रौशन है साहेब की कोठी से झोंपड़ी गरीब की।।०४

अंधेरे को बुरा अब मत कहना
बच जाते हैं बेआबरू होकर गली से गुजरने से

हालात सामना करने लायक ना भी हों
गला साफकर गर्दन सीधा रखना ही तो है
छिपाये मुंह अपना वो जो धरे गये थे कल
यहां जुर्म को बस हाथों से फिसलना ही तो हैं।।०५

अंधेरे को बुरा अब मत कहना
उजाले का जश्न मनाने वालों सबके नसीब एक से नहीं

तुम्हारे सुखों के दामन में उस पसीने की बू
महक पाओं तो समझोगे उसमे आंसू भी हैं
किसी तरह पलंग पर काटते हो दिन अपने
जहां काटते मच्छर वहां खाक आते है सपने।।०६

अंधेरा बुरा है अब मत कहना
बड़ा जरूरी होता है कुछ बातों पर गुमनामी का पर्दा

अमीर की बेटी घर से निकलती है अंधेरे में
बेवा गरीब की दिन के उजाले मे मजूरी पे गई
हुआ बदनाम कौन सभी जानते हैं
पर बड़े को बुरा कहां मानते हैं।।०७

रविवार, 26 नवंबर 2023

गुरू नानक जी

सतगुरु नानक परगटिया
मिटी धुंध जग चानन होआ। 

सिख धर्म के प्रथम #गुरु एवं संस्थापक श्री #गुरु_नानक_देव_जी की पावन #GuruNanakJayanti के अवसर पर समस्त देशवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं..!
#GuruNanakDevJi की शिक्षाओं का हृदय से पालन करें
बाबा #नानक जी #जयंती
#jayanti
#Ssps96

आंसू

सिसकती रातों की मंजिल क्या है लरजते आसुंओं से हासिल क्या है जीते तो मिल ही जाती बादशाहत  पर हार जाने पे मुकम्मल क्या है।। थके तो...